यमुना के डूब क्षेत्र से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुचाने में जुटी केजरीवाल सरकार

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नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना का जल स्तर खतरे के निशान को पार कर गया है. ऐसे में केजरीवाल सरकार ने यमुना के डूब क्षेत्र में आने वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने काम शुरू कर दिया है. इसी के मद्देनजर मंगलवार को सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री सौरभ भारद्वाज ने अक्षरधाम में राहत उपाय की तैयारियों की समीक्षा की.

मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली सरकार किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है और डूब क्षेत्र से लोगों को निकालना शुरू कर दिया गया है। प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को दिल्ली के अलग-अलग जिलों में बने शिविरों में स्थानांतरित किया जा रहा है। इसके अलावा विभागीय अधिकारियों को सतर्क रहने और संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए है। वहीं, डूब क्षेत्र में लोगों की मदद के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल और नौकाएं तैनात की गई हैं।

शिविरों में लोगों के लिए रहने व भोजन का प्रबंध

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री सौरभ भारद्वाज ने बताया कि अनुमान के अनुसार कल रात से यमुना डेंजर मार्क से ऊपर बह रही है। यमुना तट पर रह रहें जेजे क्लस्टर के लोगों को टेंट्स में रेस्क्यू कर लाया जा रहा है। दिल्ली के 6 डिस्ट्रिक्ट में करीब 2 से ढाई हजार शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में लोगों के लिए रहने व भोजन का प्रबंध किया गया है। जैसे यमुना खतरे के निशान से नीचे हो जाएगी, ये लोग वापस चले जाएंगे। इन शिविरों में लोगों की सुविधा के लिए दरी और गद्दें की भी व्यवस्था की गई है। अगर किसी तरह की बीमारी के संकेत मिलते हैं तो सरकार की ओर से मेडिकल टीम भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि ईस्ट डिस्ट्रिक्ट में करीब 1700 से ज्यादा शिविर स्थापित किए गए है। नार्थ ईस्ट और साउथ ईस्ट में करीब 200 शिविर है। कल रात से ही डिस्ट्रिक्ट टीम लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने में लगी है। डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों से आग्रह है कि आप असुरक्षित स्थान को छोड़कर शिविरों में आ जाएं, ताकि कोई दुर्घटना ना हो।

यमुना के जलस्तर की निगरानी के लिए स्थापित किए गए हैं नियंत्रण कक्ष

बता दें कि दिल्ली में बाढ़ के खतरे को दो फैक्टर पर देखने की जरूरत है। पहला, दिल्ली में कितनी बारिश हुई। दिल्ली में हुई बारिश से दिल्ली में बाढ़ आने का खतरा बहुत कम है। दूसरा, हिमाचल से हरियाणा में पानी आता है और हरियाणा से यमुना के जरिए दिल्ली में आता है। हथिनी कुंड से यमुना में जो पानी छोड़ा जाता है, उस पानी पर दिल्ली में बाढ़ का खतरा ज्यादा निर्भर है। ऐसे में दिल्ली सरकार ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों और यमुना के जलस्तर की निगरानी के लिए एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष सहित कई नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं.