आम आदमी पार्टी से दुर्भावना के चलते केंद्र सरकार ने दिल्ली और पंजाब सरकार की झांकी के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है : सौरभ भारद्वाज

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नई दिल्ली :

दिल्ली सचिवालय में हुई एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा, कि यह बेहद ही अफसोजनक बात है, कि पिछले 3 साल से केंद्र सरकार 26 जनवरी ( Republic Day ) को होने वाली झांकी परेड में दिल्ली की झांकियों के संबंध में दिए जाने वाले प्रस्ताव को ठुकरा रही है I उन्होंने कहा कि दिल्ली इस देश की राजधानी है और यह सभी झांकियां दिल्ली में ही निकाली जाती हैं और बड़े ही आश्चर्य की बात है, कि दिल्ली की झांकियों को ही इस 26 जनवरी की परेड में पिछले 3 साल से जगह नहीं दी जा रही है.

पिछले 3 साल में दिल्ली सरकार की ओर से दिए गए प्रस्तावों के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए मंत्री सौरभ भारद्वाज ने बताया कि सन 2022 में हमने रिजॉल्व-75 नामक विषय पर अपना प्रस्ताव दिया था, इसी प्रकार से 2023 में हमने नारी शक्ति नामक विषय पर अपना प्रस्ताव दिया था और इस बार 2024 की झांकी परेड के लिए हमने विकसित भारत नामक विषय पर अपना प्रस्ताव दिया था I लगातार पिछले 3 साल से केंद्र सरकार हमारे, दिल्ली की 26 जनवरी की परेड झांकी में शामिल होने के, प्रस्तावों को नकारती आ रही है, ठुकरा रही है.

मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा, कि केंद्र शासित भाजपा सरकार का यह दोहरा चरित्र समझ के बिल्कुल पर है, कि एक तरफ तो भाजपा नेता जनता के बीच इस बात को कह रहे हैं, कि किसी की झांकी का स्वीकृत होना उसके विषय पर निर्भर करता है और दूसरी तरफ सभी राज्यों को झांकी तैयार करने हेतु जो विषय दिया जाता है वह केंद्र सरकार की ओर से ही दिया जाता है. उन्होंने कहा कि जब विषय केंद्र सरकार की ओर से ही दिया जाता है और सभी राज्य उस विषय के अनुसार ही अपनी झांकियां की तैयारी करते हैं, साथ ही साथ केंद्र सरकार द्वारा यदि इन झांकियां में कुछ बदलाव करने, कुछ परिवर्तन करने के निर्देश दिए जाते हैं, तो राज्य केंद्र सरकार के आदेश अनुसार वह परिवर्तन भी कर लेते हैं, तो फिर किस आधार पर भाजपा के नेता इस बात को कह रहे हैं की झांकियों की स्वीकृति तो उसके विषय पर निर्भर करती है.

मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस झांकी परेड के संबंध में यह बात तो कतई नहीं कहीं जा सकती, कि इन झांकियों का बनाना कोई प्रतियोगिता है. क्योंकि झांकी बनाने के लिए विषय तो केंद्र सरकार की ओर से ही मिलता है और उस विषय के अनुसार ही सभी राज्य अपनी अपनी झांकियां तैयार करते हैं. मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हमने भी केंद्र सरकार द्वारा दिए गए विषय के अनुसार ही अपना झांकी का प्रस्ताव तैयार किया था और हमारे प्रस्ताव के संबंध में केंद्र सरकार की तरफ से कुछ बदलाव के सुझाव आए थे, जिसको हमने स्वीकार भी कर लिया था और यदि केंद्र सरकार के कुछ और भी सुझाव होते तो दिल्ली सरकार उन सुझाव पर भी अवश्य विचार करती I परंतु यह बड़ा ही दुखद है, कि केंद्र सरकार के द्वारा दिए गए विषय पर झांकी का प्रस्ताव तैयार करने और केंद्र सरकार द्वारा सुझाए गए बदलाव को स्वीकृत करने के बावजूद भी दिल्ली सरकार की झांकियों को दिल्ली में होने वाली 26 जनवरी की परेड में शामिल होने का मौका नहीं दिया गया.

2024 में होने वाली 26 जनवरी की परेड के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए विषय “विकसित भारत” के संबंध में जानकारी देते हुए मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा, कि विकसित भारत के संबंध में कोई भी राज्य अपनी झांकियां में सामान्यतः क्या विषय वस्तु क्या चीज प्रस्तुत कर सकता है. उन्होंने कहा कि भारत किस प्रकार से विकसित होता है, उन्होंने कहा कि भारत अच्छी शिक्षा प्रणाली और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं से विकसित होगा. उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार ने भी अपने प्रस्ताव में दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक और दिल्ली की बेहतर शिक्षा प्रणाली हेतु दिल्ली के स्कूलों को रखा था I परंतु उसके बावजूद भी केंद्र सरकार ने दिल्ली की ओर से झांकी के लिए दिए गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया.

मंत्री सौरभ भारद्वाज ने केंद्र में बैठी भाजपा सरकार की नियत पर प्रश्न उठाते हुए कहा, कि केंद्र में बैठी भाजपा सरकार केवल और केवल आम आदमी पार्टी से बदला लेने की नीयत से इस प्रकार का रवैया अपना रही है. उन्होंने अपनी बात को सत्यापित करते हुए कहा कि ऐसा नहीं है कि केंद्र सरकार ने सिर्फ दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा दिए गए झांकी के प्रस्ताव को अस्वीकार किया है, बल्कि पंजाब में भी आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा दिए गए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है. केंद्र सरकार के इस कृत्य से साफ तौर पर यह समझा जा सकता है, कि दिल्ली और पंजाब की सरकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए झांकी के प्रस्ताव को किसी त्रुटि या कमी के आधार पर नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी के प्रति दुर्भावना के आधार पर अस्वीकार किया गया है.